वन की देवियाँ ll Van Devis - A Hindi Horror Story ll kahaniya

 


 

                                   

 प्रारंभ:-

त्तराखंड के पहाड़ों के बीच बसे छोटे से गांव "संध्या" की एक कहानी है। यहां का जंगल, जो गांव से सटा हुआ था, अपने रहस्यमय और डरावने किस्सों के लिए मशहूर था। गांव के बुजुर्ग कहते थे कि इस जंगल में "वन देवियाँ" रहती हैं। वे शक्तिशाली आत्माएँ थीं, जो जंगल की रक्षा करती थीं, लेकिन अगर कोई उनके नियम तोड़ता, तो उसे क्रूर दंड भुगतना पड़ता।गांव के युवा इन बातों को मात्र दंतकथा मानते थे। लेकिन, कुछ घटनाएँ ऐसी थीं, जो इस कहानी को सच साबित करती थीं।

जंगल का नियम:-

गांव के लोग जंगल में जाने से पहले देवी को चढ़ावा चढ़ाते थे। यह एक नियम था कि सूर्यास्त के बाद जंगल में कोई नहीं जाएगा। अगर किसी ने यह नियम तोड़ा, तो वह कभी लौटकर नहीं आता।

रहस्यमयी आमंत्रण:-
एक दिन गांव के तीन युवक - अजय, विक्रम, और सुरेश ने जंगल की सच्चाई जानने की ठानी। वे मानते थे कि यह सब सिर्फ बुजुर्गों का डराने का तरीका है। अजय ने कहा,
"ये सब बकवास है। चलो, आज हम सूर्यास्त के बाद जंगल में जाकर देखेंगे कि वहां क्या है।"
विक्रम और सुरेश ने सहमति जताई।

जंगल की ओर यात्रा:-
रात के आठ बजे तीनों दोस्त अपने हाथों में टॉर्च और एक धारदार चाकू लेकर जंगल की ओर चल पड़े। जैसे ही उन्होंने जंगल में कदम रखा, उन्हें अजीब-सी ठंडी हवा महसूस हुई। वातावरण अचानक भारी और डरावना हो गया।जंगल के अंदर पहुँचते ही चारों ओर सन्नाटा छा गया। पत्तों की सरसराहट और झींगुरों की आवाज भी धीरे-धीरे बंद हो गई।

पहला संकेत:-
थोड़ी दूर चलने पर उन्हें एक बड़ा पीपल का पेड़ दिखा, जिसके नीचे देवी की मूर्ति थी। वहां बिखरे हुए फूल और अधजली अगरबत्तियाँ थीं। विक्रम ने हंसते हुए कहा,
"लगता है ये वही जगह है जहां लोग पूजा करने आते हैं।"
सुरेश ने मूर्ति को पैर से छूकर कहा,
"कुछ नहीं होगा। ये सब ढोंग है।"

जैसे ही सुरेश ने यह किया, अचानक ठंडी हवा तेज हो गई। चारों तरफ झींगुरों की आवाज इतनी बढ़ गई कि उनके कान सुन्न होने लगे।

अंधेरे का प्रकोप:-
तीनों ने तेजी से आगे बढ़ना शुरू किया। लेकिन जितना वे चलते, जंगल और घना और डरावना होता गया। अचानक, अजय ने देखा कि उनके पीछे एक परछाई चल रही थी।
"तुम लोगों ने देखा?" अजय ने डरते हुए पूछा।
"क्या?" विक्रम ने जवाब दिया।
"पीछे कोई है।"
तीनों ने पीछे मुड़कर देखा, लेकिन वहां कुछ नहीं था। वे और तेज़ी से चलने लगे। तभी सुरेश के पीछे से किसी ने उसका कंधा खींचा। सुरेश ने चीखते हुए कहा,
"किसने पकड़ा मुझे?"
लेकिन उसके पीछे कोई नहीं था।

वन देवियों का प्रकट होना:-
आखिरकार, वे एक खुली जगह पर पहुंचे। वहां चाँदनी रोशनी में तीन औरतें खड़ी थीं। उनके बाल लंबे और खुले हुए थे, और उनकी आँखें जलती हुई लाल थीं। उनकी उपस्थिति से चारों ओर ठंडक और सन्नाटा फैल गया।

अजय ने धीमे स्वर में कहा,
"ये कौन हैं?"
उनमें से एक औरत ने कहा,
"तुमने हमारे नियम तोड़े हैं। अब तुम हमारी दुनिया से बाहर नहीं जा सकते।"

विक्रम ने हिम्मत जुटाकर कहा,
"हम सिर्फ देखने आए थे। हमें जाने दो।"
औरतें हंसी। उनकी हंसी से पेड़ हिलने लगे।
"अब तुम हमारी शरण में हो। तुम्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।"

भागने का प्रयास:-
डर के मारे तीनों युवक भागने लगे। लेकिन जंगल जैसे उन्हें अपने अंदर खींच रहा था। रास्ता बंद हो चुका था। पेड़ अपनी जगह बदल रहे थे। अजय ने चिल्लाते हुए कहा,
"यहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं है!"
तभी विक्रम अचानक ज़मीन में गिर गया। जैसे ही सुरेश और अजय उसे उठाने पहुंचे, वे देख नहीं पाए कि विक्रम का चेहरा एकदम सफेद हो चुका था। उसकी आँखें खुली थीं, लेकिन वह मर चुका था।

अंतिम मुठभेड़:-
सुरेश और अजय ने हिम्मत कर आगे बढ़ने की कोशिश की। लेकिन हर बार वही पीपल का पेड़ उनके सामने आ जाता। अचानक वे दोनों हवा में उठ गए। औरतें फिर से प्रकट हुईं। उन्होंने कहा,
"तुमने हमारे नियम तोड़े, अब तुम हमारी सेवा करोगे।"

अगले दिन गांव वालों ने जंगल के पास सुरेश और अजय के जूते पाए। लेकिन उनकी कोई निशानी नहीं मिली। उनकी कहानी गांव में एक और डरावनी दंतकथा बनकर रह गई।

निष्कर्ष:-
कहानी खत्म हो गई, लेकिन जंगल की दहशत बढ़ गई। अब कोई भी सूर्यास्त के बाद जंगल की ओर देखने तक की हिम्मत नहीं करता। वन देवियाँ आज भी वहां हैं, अपनी दुनिया की रक्षा करती हुईं।

शिक्षा:-
प्रकृति के नियमों का सम्मान करना चाहिए। अगर हम इन्हें तोड़ते हैं, तो इसका परिणाम भयानक हो सकता है।

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