रात का आखिरी यात्री latest horror story in hindi ll darawani kahaniya
रात का आखिरी यात्री:
शहर से दूर एक छोटा-सा स्टेशन था – "मौनपुर जंक्शन"। यह स्टेशन रात के समय सुनसान हो जाता था। अंतिम ट्रेन रात 11 बजे गुजरती थी, और उसके बाद पूरे स्टेशन पर अंधेरा और सन्नाटा छा जाता। लेकिन इस स्टेशन के बारे में एक बात बहुत मशहूर थी – यहाँ रात को जो भी अकेला होता, वह कभी वापस नहीं लौटता।
रहस्यमय आखिरी ट्रेन:
कहानी शुरू होती है रोहन से, जो एक नौकरी के सिलसिले में पास के गाँव जा रहा था। उसने तय किया कि वह रात की आखिरी ट्रेन से यात्रा करेगा। स्टेशन पर पहुंचकर उसे महसूस हुआ कि यहाँ अजीब-सी खामोशी है। एक बूढ़ा चायवाला, जो वहीं खड़ा था, बोला,
"बेटा, रात की आखिरी ट्रेन मत पकड़ना।"
रोहन हंसते हुए बोला, "बाबा, आप भी अंधविश्वास की बातें करते हैं।"
बाबा ने गहरी सांस लेते हुए कहा,
"यह अंधविश्वास नहीं, सच्चाई है। यहाँ रात को अजीब चीजें होती हैं।"
ट्रेन का आगमन:
रात 11 बजे ट्रेन आई। रोहन उस पर चढ़ गया। डिब्बा लगभग खाली था। सिर्फ एक कोने में एक औरत बैठी थी, जिसने सफेद साड़ी पहन रखी थी। रोहन ने उसे एक बार देखा और फिर अपनी सीट पर बैठ गया। ट्रेन ने धीरे-धीरे चलना शुरू किया।
जैसे ही ट्रेन स्टेशन से निकली, रोहन को कुछ अजीब महसूस हुआ। डिब्बे में हल्की ठंडक फैलने लगी। उसने ध्यान दिया कि औरत बिल्कुल भी हिली-डुली नहीं थी। वह बस खिड़की से बाहर देख रही थी।
डरावनी घटनाएं:
कुछ समय बाद, रोहन को ऐसा लगा जैसे कोई उसके बगल से गुजरा हो। लेकिन जब उसने देखा, तो वहाँ कोई नहीं था। उसने फिर उस औरत की ओर देखा। इस बार वह सीधे उसे घूर रही थी। उसकी आँखें बड़ी और चमकदार थीं।
रोहन ने डरते हुए पूछा, "आप कौन हैं? इस समय अकेली यात्रा क्यों कर रही हैं?"
औरत ने धीमे स्वर में कहा,
"तुम यहाँ क्यों आए? यह ट्रेन सिर्फ मृत लोगों के लिए है।"
सच्चाई का पता:
रोहन के रोंगटे खड़े हो गए। उसने खिड़की से बाहर देखा। ट्रेन किसी गहरी घाटी की ओर जा रही थी। चारों तरफ अंधेरा था, और दूर-दूर तक कोई स्टेशन नहीं दिख रहा था। तभी उसे याद आया कि चायवाले ने कहा था,
"रात की आखिरी ट्रेन मत पकड़ना।"
रोहन ने हिम्मत करके खड़े होने की कोशिश की, लेकिन उसके पैर कांपने लगे। तभी ट्रेन के डिब्बे में और भी साए दिखाई देने लगे। हर साया उसकी ओर बढ़ रहा था।
जान बचाने की कोशिश:
रोहन ने जोर से चिल्लाया और अगले डिब्बे की ओर भागने लगा। लेकिन हर दरवाजा बंद था। अचानक वह फिर उसी औरत के सामने आ गया। औरत ने अपनी सड़ी-गली शक्ल दिखाते हुए कहा,
"यह ट्रेन तुम्हारी आखिरी सवारी है।"
रोहन ने खुद को खिड़की से बाहर फेंकने का प्रयास किया। जैसे ही उसने छलांग लगाई, ट्रेन गायब हो गई।
सुबह की कहानी:
अगली सुबह स्टेशन मास्टर ने रेलवे ट्रैक के पास एक बेहोश व्यक्ति को पाया। वह रोहन था। उसने किसी तरह खुद को बचा लिया था। जब उसने स्टेशन मास्टर को रात की घटना बताई, तो मास्टर ने गंभीर होकर कहा,
"तुम खुशकिस्मत हो। यह ट्रेन उन लोगों को ले जाती है, जिनकी आत्मा भटक रही होती है।"
इसके बाद रोहन ने कभी रात में यात्रा न करने की कसम खाई।
सीख:
हर चेतावनी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कभी-कभी पुरानी कहानियाँ सच्चाई पर आधारित होती हैं।
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