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भूइयां का श्राप
प्रारंभ:-
यह कहानी बिहार के एक सुदूर गांव की है, जहां लोग ‘भूइयां बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध एक पुराने मंदिर से खौफ खाते थे। गांव के बुजुर्गों का कहना था कि वह मंदिर श्रापित था। जिसने भी वहां जाने की हिम्मत की, वह या तो पागल हो गया या फिर लौटकर कभी नहीं आया।गांव के चारों तरफ हरियाली थी, लेकिन उस मंदिर के पास केवल सूखी ज़मीन और काले पेड़ थे। लोग कहते थे कि वहां पाताल लोक से जुड़े रहस्यमय द्वार हैं, जहां भूइयां बाबा की आत्मा भटकती है।
साहसिक खोज:-
अजय और मोहन, गांव के दो जिज्ञासु युवा, इन कहानियों को महज अंधविश्वास मानते थे। उन्होंने ठान लिया कि वे मंदिर जाकर वहां की सच्चाई जानेंगे। गांववालों ने उन्हें बहुत समझाया, लेकिन वे नहीं माने।
"अगर हम सच नहीं जानेंगे, तो यह डर हमेशा बना रहेगा," अजय ने कहा।
मंदिर तक का रास्ता:-
रात का समय चुना गया, क्योंकि मान्यता थी कि रात में वहां आत्माएं सक्रिय होती हैं। दोनों ने अपनी मशालें लीं और मंदिर की ओर बढ़े। रास्ता घना और भयावह था। पेड़ों की शाखाएं अजीब आवाजें कर रही थीं, और हवा में अजीब सी ठंडक थी।
जब वे मंदिर के पास पहुंचे, तो वहां एक पुराना पत्थर का द्वार था। उस पर अजीब से निशान और कुछ लिपियां खुदी हुई थीं। जैसे ही उन्होंने द्वार खोला, ठंडी हवा का एक झोंका निकला, और उनके कानों में किसी के रोने की आवाज गूंजने लगी।
मंदिर के भीतर:-
मंदिर के अंदर एक टूटी हुई मूर्ति थी, और दीवारों पर खून जैसे लाल धब्बे थे। अजय ने दीवार के पास एक गड्ढा देखा, जो अंधेरे में कहीं गहराई तक जा रहा था।
"यह शायद वही पाताल का द्वार है," मोहन ने कांपते हुए कहा।
जैसे ही वे गड्ढे के पास पहुंचे, अचानक मंदिर में हलचल होने लगी। मूर्ति के पास रखे घड़े अपने आप गिरने लगे, और फर्श पर बड़ी दरारें बनने लगीं।
भूइयां बाबा का प्रकट होना:-
अचानक मंदिर में धुंध छा गई। उस धुंध से एक काले साये ने आकार लिया। वह भूइयां बाबा का भूत था। उसकी आंखें आग की तरह जल रही थीं, और उसकी आवाज गूंजती हुई निकली,
"कौन है जिसने मेरी शांति भंग की?"
अजय और मोहन डर से कांपने लगे। उन्होंने माफी मांगी, लेकिन भूइयां बाबा ने कहा,
"यह जगह मेरी है। जिसने भी यहां आने की कोशिश की, उसने अपनी मौत को बुलावा दिया।"
भागने की कोशिश:-
अजय और मोहन ने भागने की कोशिश की, लेकिन द्वार अपने आप बंद हो गया। मंदिर की दीवारें सिमटने लगीं, और चारों तरफ आग की लपटें उठने लगीं। किसी तरह अजय ने हिम्मत करके अपने साथ लाया हुआ लोहे का रॉड उठाया और दरवाजे को तोड़ दिया।दोनों ने मंदिर से बाहर भागते ही देखा कि वह मंदिर धुएं में गायब हो गया।
अंत:-
अजय और मोहन ने गांव लौटकर सबको यह घटना बताई। उस दिन के बाद वे कभी सामान्य नहीं हो पाए। वे हर रात भयानक सपने देखते थे और मंदिर की भूतिया शक्तियां उनके जीवन का हिस्सा बन गईं।
गांववालों ने फैसला किया कि उस मंदिर के पास जाने की गलती कोई दोबारा नहीं करेगा। आज भी लोग उस जगह से दूर रहते हैं, और वहां से किसी के चीखने की आवाजें आती हैं।
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